स्वाभिमान न्यूज़ | आंजनेय पांडेय, कैफ खान
रायगढ़। कोटवारी भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ हरबंस श्रवण सिंह एवं एक व्यक्ति जिसे स्थानीय लोग “फौजी” के नाम से जानते हैं, पर कोटवारी जमीन हड़पने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रशासनिक मिलीभगत के चलते न केवल कोटवारी भूमि छीनी गई, बल्कि इस सदमे में कोटवार की मृत्यु तक हो गई।
कोटवार के पुत्र महिपत चौहान ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनके पिता से आरोपियों ने खसरा नंबर 149 एवं 150 की कोटवारी भूमि में से लगभग 40 फीट लंबा और 200 फीट चौड़ा हिस्सा मांगा था। जब उनके पिता ने यह कहते हुए जमीन देने से इनकार किया कि कोटवारी भूमि की न तो खरीद–बिक्री हो सकती है और न ही इसे किसी को दिया जा सकता है, तब आरोपियों ने कथित तौर पर धमकी दी कि “देना तो पड़ेगा, नहीं तो हम ले लेंगे।”
महिपत चौहान का आरोप है कि तत्कालीन आरआई, पटवारी और एसडीएम की सांठगांठ से उक्त भूमि को अवैध रूप से अपने नाम दर्ज करा लिया गया। इस घटना से उनके पिता गहरे सदमे में चले गए और लगभग दो माह के भीतर उनका निधन हो गया।
पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर से की थी, जिस पर कलेक्टर द्वारा संबंधित आरआई और पटवारी को हटाया भी गया, लेकिन कोटवारी भूमि को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि बीते एक दशक से उक्त भूमि का किराया भी आरोपी पक्ष द्वारा लिया जा रहा है।
इतना ही नहीं, अब शेष बची कोटवारी भूमि पर भी नजर होने का आरोप लगाया गया है। महिपत चौहान का कहना है कि सिविल केस भी कोटवारी भूमि बताते हुए खारिज कर दिया गया, जबकि शासकीय नियमों के अनुसार कोटवारी जमीन का स्वामित्व परिवर्तन संभव ही नहीं है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जिला प्रशासन से अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राजस्व विभाग इसी तरह लापरवाही बरतता रहा, तो कोटवार जैसे शासकीय सेवकों को आखिर कैसे न्याय और सुरक्षा मिल पाएगी।



