ललित मुखर्जी | स्वाभिमान न्यूज़
पिथौरा। विकासखंड अंतर्गत कृषि साख सहकारी समिति आरंगी के तहत संचालित धान खरीदी केंद्रों में करोड़ों रुपये के धान घोटाले का मामला सामने आया है। एक ओर जहां उपार्जन केंद्र बम्हनी के खरीदी प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है, वहीं नरसैयापल्लम केंद्र में हुए करोड़ों के गबन मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, उपार्जन केंद्र बम्हनी के खरीदी प्रभारी गंगाधर जगत के खिलाफ 3742 क्विंटल धान घोटाले, जिसकी कीमत 1 करोड़ 16 लाख 200 रुपये बताई गई है, के मामले में बसना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं दूसरी ओर, नरसैयापल्लम धान खरीदी केंद्र में 3642.72 क्विंटल धान का कथित घोटाला सामने आया है। इस मामले में 1 करोड़ 12 लाख 92 हजार 432 रुपये के गबन का आरोप है। पिरदा शाखा प्रबंधक उषत प्रधान द्वारा दोनों मामलों में 26 मई को बसना थाना में लिखित आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी तथा इसकी पावती भी प्राप्त की गई थी। इसके बावजूद पुलिस द्वारा केवल बम्हनी मामले में कार्रवाई कर नरसैयापल्लम प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालने के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नरसैयापल्लम मामले में सत्ताधारी दल के एक जनप्रतिनिधि का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। आरोप है कि इसी राजनीतिक दबाव के चलते संबंधित प्रबंधक महेंद्र प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है।
करोड़ों के घोटाले में कई जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल
इधर, बम्हनी मामले में भी पुलिस कार्रवाई केवल खरीदी प्रभारी तक सीमित रहने पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों के इस घोटाले में प्राधिकृत, कम्प्यूटर ऑपरेटर, बारदाना प्रभारी तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किंतु अब तक जांच का दायरा इन तक नहीं पहुंचा है।
नोडल अधिकारी की भूमिका भी संदेह के दायरे में
गौरतलब है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी में पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार रोकने के उद्देश्य से कलेक्टर द्वारा पिरदा शाखा के लिए डिप्टी कलेक्टर तेजपाल सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। लेकिन उन्हीं की निगरानी में करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले के सामने आने से उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
उल्लेखनीय है कि बम्हनी और नरसैयापल्लम दोनों ही धान खरीदी केंद्र आरंगी सोसायटी के अंतर्गत संचालित होते हैं। दोनों केंद्रों में कुल मिलाकर 2 करोड़ 28 लाख 92 हजार 632 रुपये के गबन का मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

