43 घंटे की तलाश के बाद खत्म हुई उम्मीद, झाड़ियों में मिला हरिशंकर का शव

स्वाभिमान न्यूज़ | पिथौरा

ग्राम कौड़िया स्थित जोक नदी के एनीकट में रविवार दोपहर तेज बहाव की चपेट में आकर लापता हुए 16 वर्षीय हरिशंकर ठाकुर की तलाश आखिरकार मंगलवार सुबह दुखद अंत के साथ समाप्त हुई। घटना के तीसरे दिन हरिशंकर का शव घटनास्थल से करीब 50 मीटर दूर अर्जुन पेड़ के पास झाड़ियों में फंसा मिला। नदी में पानी का स्तर कम होने के बाद ग्रामीणों की नजर झाड़ियों में फंसे शव पर पड़ी। शव मिलने की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।




रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे ग्राम कौड़िया निवासी पांच युवक जोक नदी के एनीकट में नहाने पहुंचे थे। इसी दौरान 16 वर्षीय हरिशंकर ठाकुर, पिता गणेश ठाकुर और अजित बरिहा, पिता रामभाऊ बरिहा ने एनीकट से नीचे की ओर पानी में छलांग लगा दी थी। नदी में उस समय पानी का बहाव काफी तेज था। पानी में उतरते ही दोनों युवक तेज धार की चपेट में आ गए और बहने लगे।


मृतक हरिशंकर ठाकुर


साथियों की चीख-पुकार के बीच एनीकट के पास काम कर रहे चैन माउंटेन मशीन के चालक ने तत्परता दिखाते हुए बांस के सहारे अजित बरिहा को पानी से बाहर निकाल लिया था। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिथौरा ले जाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत सामान्य बताई गई। लेकिन हरिशंकर तेज बहाव में बहते हुए देखते ही देख ओझल हो गया था।


दो दिन तक चला सघन सर्च ऑपरेशन

हरिशंकर के नदी में बहने के बाद रविवार शाम से ही उसकी तलाश शुरू कर दी गई थी। सोमवार को जिला आपदा बचाव दल ने इलेक्ट्रॉनिक बोट की मदद से नदी के गहरे हिस्सों, एनीकट के आसपास और बहाव वाले क्षेत्रों में दिनभर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। नदी की गहराई और तेज बहाव के कारण बचाव दल को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा।


टीम ने नदी के संभावित हिस्सों को खंगाला, लेकिन देर शाम तक हरिशंकर का कोई सुराग नहीं मिल सका। इस दौरान उसके परिजन और ग्रामीण नदी किनारे डटे रहे। हर गुजरते घंटे के साथ परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा सुरक्षित मिल जाएगा।


मंगलवार सुबह मिली वह खबर, जिसका डर था

मंगलवार सुबह नदी का पानी कुछ कम हुआ तो ग्रामीणों ने घटनास्थल के आसपास फिर से नजर दौड़ाई। इसी दौरान एनीकट से करीब 50 मीटर दूर अर्जुन पेड़ के पास झाड़ियों में कुछ फंसा दिखाई दिया। पास जाकर देखने पर ग्रामीणों के होश उड़ गए। झाड़ियों में हरिशंकर का शव फंसा हुआ था।


शव मिलने की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन को दी गई। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने शव को बाहर निकलवाने की कार्रवाई शुरू की। हरिशंकर का शव मिलने की खबर जैसे ही उसके परिजनों तक पहुंची, उनके सब्र का बांध टूट गया। जिस बेटे की दो दिनों से नदी के हर मोड़ पर तलाश की जा रही थी, आखिरकार वही बेटा निर्जीव अवस्था में मिला।


नदी किनारे दो दिन से टिकी थीं परिजनों की आंखें

हरिशंकर के लापता होने के बाद से उसके परिजन लगातार नदी किनारे मौजूद थे। बचाव दल की हर गतिविधि पर उनकी निगाहें टिकी रहती थीं। नदी के पानी में दूर तक देखते हुए परिजन शायद हर पल यही उम्मीद कर रहे थे कि कहीं से हरिशंकर वापस आता दिखाई दे जाए।


लेकिन मंगलवार की सुबह उनकी यह उम्मीद हमेशा के लिए टूट गई। नदी की झाड़ियों में मिला हरिशंकर का शव पूरे परिवार के लिए ऐसा सदमा बन गया, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी।


मौज-मस्ती का पल बदल गया मातम में

रविवार दोपहर पांच युवक जिस नदी में नहाने और मौज-मस्ती करने पहुंचे थे, उसी नदी ने कुछ ही पलों में एक परिवार से उसका 16 वर्षीय बेटा छीन लिया। घटना के बाद से गांव में भी शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में तेज बहाव और एनीकट के नीचे गहराई को देखते हुए युवाओं को सावधानी बरतने की जरूरत है।

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