एससी-एसटी एक्ट मामले में भाजपा नेता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, 24 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं

पिथौरा | स्वाभिमान न्यूज़ 

आदिवासी परिवार के साथ कथित जातिसूचक गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी एवं जमीन विवाद से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य  पिछड़ा वर्ग मोर्चा के नेता दुलीकेशन साहू को बड़ा झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज होने के 24 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं।



गौरतलब है कि ग्राम टेका पारा सुंदरगढ़ निवासी मनबोध कोड़ाकू की शिकायत पर 6 मई 2026 को दुलीकेशन साहू एवं उनकी पत्नी किरण साहू के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 संशोधित अधिनियम 2015 की धारा 3(1)(द), 3(1)(ध), 3(2)(v) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 351(2) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।


एफआईआर के अनुसार 10 नवंबर 2025 को ग्राम डोंगरीपाली स्थित खसरा नंबर 425/1 रकबा 1.37 हेक्टेयर भूमि में मनबोध कोड़ाकू अपने परिवार के साथ धान की कटाई कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान दुलीकेशन साहू और उनकी पत्नी किरण साहू खेत पहुंचे और उक्त भूमि को अपना बताते हुए मनबोध कोड़ाकू, उनके भाई तथा परिवार की महिलाओं के साथ जातिसूचक गाली-गलौज की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी तथा अपने राजनीतिक प्रभाव का हवाला देते हुए कार्रवाई कराने की बात कही।


पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि बाद में राजस्व अधिकारियों के माध्यम से उक्त खेत में तैयार धान की फसल मनबोध कोड़ाकू की अनुपस्थिति में कटवाकर जप्त करा दी गई, जबकि विरोधी पक्ष द्वारा जमीन पर अपने दावे के समर्थन में आज पर्यन्त तक कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। यह मामला वर्तमान में एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है।


पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने थाना, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। न्याय नहीं मिलने से परेशान मनबोध कोड़ाकू ने मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी थी, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और एफआईआर दर्ज की गई।


24 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, पीड़ित परिवार में भय का माहौल

एफआईआर दर्ज होने के 24 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। परिवार का आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे उन्हें लगातार दबाव और खतरे की आशंका बनी हुई है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस प्रशासन से तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की है।


एफआईआर दर्ज होने के बाद दुलीकेशन साहू एवं किरण साहू ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी और अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

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