तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान गौर का तांडव: एक की मौत, दो घायल

बारनवापारा | स्वाभिमान न्यूज़ 

छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बारनवापारा परियोजना मंडल अंतर्गत रवान रेंज क्षेत्र में मंगलवार सुबह तेंदूपत्ता संग्रहण करने जंगल गए तीन ग्रामीणों पर वन्यप्राणी गौर (बाइसन) ने अलग-अलग स्थानों पर हमला कर दिया। हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल व्याप्त है।




जानकारी के अनुसार ग्राम गजराडीह निवासी देवेंद्र साहू (51 वर्ष) पिता स्व. पांडव साहू मंगलवार सुबह लगभग 8:30 बजे वन कक्ष क्रमांक 117 में तेंदूपत्ता तोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक गौर ने उन पर सींग से हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए महासमुंद स्थित सोहम हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। वन विभाग द्वारा परिजनों को तत्काल सहायता राशि के रूप में 5 हजार रुपए प्रदान किए गए।




वहीं दूसरी घटना सुबह लगभग 8 बजे वन कक्ष क्रमांक 121 में हुई, जहां मुरुमडीह निवासी पंचबाई ठाकुर (37 वर्ष) पति स्व. दुलार सिंह तेंदूपत्ता संग्रहण कर रही थीं। गौर ने उन पर हमला कर घायल कर दिया। उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में भर्ती कराया गया है। विभाग द्वारा उन्हें 1 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता राशि दी गई।


इसी तरह सुबह लगभग 9 बजे ग्राम रवान निवासी गायत्री यादव (60 वर्ष) पति मंगतू यादव पर वन कक्ष क्रमांक 118 में गौर ने हमला कर दिया। घायल अवस्था में उन्हें भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। वन विभाग ने उन्हें भी 1 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की है।




एक ही दिन में अलग-अलग वन कक्षों में गौर के हमलों की इन घटनाओं से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। बारनवापारा अभ्यारण क्षेत्र में वन्यप्राणियों की बढ़ती संख्या को लेकर ग्रामीणों में पहले से ही भय बना हुआ है। बीते कुछ वर्षों से क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं, हालांकि अब तक किसी ग्रामीण पर बाघ के हमले की घटना सामने नहीं आई है।


क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों और वनवासियों की आजीविका तेंदूपत्ता, महुआ, चार, गोंद एवं अन्य वनोपज संग्रहण पर निर्भर है। ऐसे में वन्यप्राणियों के बढ़ते हमलों के बीच जंगल में जाना उनके लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल ही उनका जीवन और आजीविका का मुख्य साधन है, इसलिए भय के बावजूद उन्हें जंगल जाना मजबूरी है।

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