महासमुंद | स्वाभिमान न्यूज़
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कर कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच देकर महासमुंद के एक युवक से 6 लाख 80 हजार रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का महासमुंद साइबर पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में मध्यप्रदेश के इंदौर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
मामला महासमुंद के नेहरू चौक निवासी मेहुल लुनिया की शिकायत से सामने आया। मेहुल ने पुलिस को बताया कि फरवरी 2026 में उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने अपना नाम विश्वजीत बताया और कहा कि वह शेयर मार्केट ट्रेडिंग से जुड़ा काम करता है और ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा दिला सकता है।
पहले नुकसान कराया, फिर फॉरेक्स ट्रेडिंग का झांसा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पहले मेहुल के डीमैट अकाउंट से ट्रेडिंग कराकर उसे करीब 70 से 80 हजार रुपये का नुकसान कराया। इसके बाद दूसरे नंबर से हर्ष भारद्वाज नाम के व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और शेयर मार्केट की जगह फॉरेक्स ट्रेडिंग में ज्यादा फायदा होने की बात कहकर उसे भरोसे में लिया।
इसके बाद मेहुल ने अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करना शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने उसके नाम से फर्जी ट्रेडिंग आईडी भी बनाई और उसे भरोसा दिलाने के लिए एक बार उसके खाते में करीब 12,845 रुपये का कथित मुनाफा भी भेजा।
मुनाफे की रकम खाते में आने के बाद मेहुल को लगा कि ट्रेडिंग सही तरीके से चल रही है। इसके बाद उससे अलग-अलग खातों में और रकम जमा कराई गई।
6.80 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा
पुलिस की जांच के अनुसार, पीड़ित से ऋषि राठौर, जितेन्द्र शर्मा और अनिकेत शर्मा से जुड़े बैंक खातों में रकम जमा कराई गई। अलग-अलग किस्तों में पीड़ित से कुल 6 लाख 80 हजार रुपये जमा कराए गए।
जब काफी समय बाद भी उसे मुनाफा नहीं मिला और उसने व्हाट्सऐप पर जानकारी मांगी तो उसे संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उसे और पैसे लगाने के लिए लगातार लालच दिया जाता रहा।
मामले में 12 मार्च 2026 को साइबर थाना महासमुंद में अपराध क्रमांक 01/2026 दर्ज किया गया।
इंदौर में बैठकर करते थे फोन
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल और तकनीकी जानकारी जुटाई। इससे आरोपियों की लोकेशन इंदौर में मिली। इसके बाद महासमुंद साइबर पुलिस की टीम ने इंदौर में दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ा।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से संपर्क करने की बात स्वीकार की है।
पुलिस का आरोप है कि ऋषि राठौर और जितेन्द्र शर्मा इंदौर के अपोलो ट्रेड सेंटर में ‘कैपिटल रिसर्च’ नाम की कंपनी से जुड़े होकर ग्राहकों को शेयर मार्केट ट्रेडिंग की जानकारी देने के नाम पर फोन करते थे। पीड़ित से बात करते समय दोनों ने कथित तौर पर अपनी असली पहचान छिपाकर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल किया।
फर्जी सिम से छिपाते थे पहचान
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम का इस्तेमाल किया था। पुलिस अब उस व्यक्ति की तलाश कर रही है, जिसने कथित तौर पर फर्जी सिम उपलब्ध कराई थी।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम ऋषि राठौर के केनरा बैंक खाते में करीब 2.50 लाख रुपये, जितेन्द्र शर्मा के बैंक ऑफ इंडिया खाते में करीब 2.90 लाख रुपये और अनिकेत शर्मा के सीहोर स्थित एक्सिस बैंक खाते में करीब 1.02 लाख रुपये जमा कराई गई।
6 मोबाइल फोन जब्त
पुलिस ने आरोपी ऋषि राठौर के कब्जे से चार मोबाइल फोन और जितेन्द्र शर्मा के कब्जे से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल की जांच से गिरोह के दूसरे लोगों और ठगी के तरीके से जुड़े और सबूत मिलने की उम्मीद है।
दोनों आरोपियों—ऋषि राठौर (28) और जितेन्द्र शर्मा उर्फ जीत उर्फ विश्वजीत (30)—को 22 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। इंदौर में न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद उन्हें मामले की आगे की कार्रवाई के लिए महासमुंद लाया गया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

