स्वाभिमान न्यूज़ | महासमुंद
पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने और ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को प्रकाश कर, सफाई कर और अन्य स्थानीय करों के नाम पर ग्रामीण परिवारों से सालाना 1200 रुपये तक वसूली करने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि टैक्स वसूली नहीं करने पर पंचायतों के विकास फंड में कटौती की धमकी दी जा रही है।
चंद्राकर ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से पहले ही किसान, मजदूर और गरीब आर्थिक दबाव में हैं। खाद, डीजल सहित खेती की लागत बढ़ी है, जबकि ग्रामीण रोजगार, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है। ऐसे में ग्रामीण परिवारों पर नया आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस ग्रांट के नाम पर पंचायतों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे जनता से कर वसूलें, तभी उन्हें विकास के लिए राशि मिलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस परिवार के लिए महीने का खर्च चलाना मुश्किल है, वह सालाना 1200 रुपये का अतिरिक्त टैक्स कैसे देगा।
पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार पर कॉरपोरेट घरानों को राहत देने और दूसरी ओर गांव के गरीबों पर टैक्स का बोझ डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि गांव कोई राजस्व वसूली का केंद्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।
चंद्राकर ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीण परिवारों पर प्रस्तावित टैक्स का फैसला वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी। उन्होंने कहा कि गांवों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

