10 लाख बच्चों की पढ़ाई पर संकट, आंगनबाड़ी केंद्रों को नहीं मिली प्री-स्कूल किट : विनोद चंद्राकर

स्वाभिमान न्यूज़ | महासमुंद

छत्तीसगढ़ के करीब 52 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में अब तक प्री-स्कूल किट नहीं पहुंचने से लगभग 10 लाख छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसे लेकर पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।




विनोद चंद्राकर ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 साल तक के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई के जरिए स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाता है। बच्चों को रंगों, आकारों, अक्षरों, गिनती और आसपास की वस्तुओं की पहचान कराने में प्री-स्कूल किट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन इस साल अगस्त खत्म होने को है और अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों तक नई प्री-स्कूल किट नहीं पहुंची है।


उन्होंने कहा कि सामान्यतः प्री-स्कूल किट की खरीदी के लिए अप्रैल-मई में टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और जुलाई में नया सत्र शुरू होने के साथ किट आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच जाती है। लेकिन इस बार अब तक न तो बजट जारी हुआ है और न ही खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो पाई है।


चंद्राकर ने बताया कि एक प्री-स्कूल किट में पजल, बिल्डिंग ब्लॉक, गुड़िया, जानवरों के मुखौटे, किचन सेट, वुडन बोर्ड सहित करीब 19 प्रकार की शिक्षण सामग्री होती है। इनकी मदद से बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाता है। एक किट की कीमत करीब 2 से 2.5 हजार रुपये बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि जब बच्चों को पढ़ाने के लिए जरूरी सामग्री ही उपलब्ध नहीं होगी तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को बेहतर तरीके से कैसे पढ़ा पाएंगी। 


कई केंद्रों में पुराने और टूटे-फूटे खिलौनों तथा सामग्री से ही काम चलाया जा रहा है। पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार पर गरीब और छोटे बच्चों की शिक्षा की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को तत्काल प्री-स्कूल किट के लिए बजट जारी करना चाहिए और जल्द से जल्द सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तक किट पहुंचाई जानी चाहिए।


उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार बताए कि आखिर कई महीनों से बजट और खरीदी की प्रक्रिया क्यों अटकी हुई है तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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