महासमुंद में ‘पुष्पा’ स्टाइल में खैर लकड़ी की तस्करी, चार राज्यों में फैला नेटवर्क

महासमुंद | स्वाभिमान न्यूज़ 

फिल्म ‘पुष्पा’ में आपने देखा होगा कि कैसे जंगल से लकड़ी की तस्करी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला होता है और तस्कर अपने अवैध कारोबार को वैध दिखाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला महासमुंद जिले में सामने आया है, जहां खैर लकड़ी के अवैध परिवहन, कथित फर्जी एनओसी और बिलिंग के जरिए तस्करी के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। हालांकि, यह मामला फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि पुलिस की जांच से जुड़ा वास्तविक प्रकरण है।




महासमुंद पुलिस के मुताबिक, खैर लकड़ी की तस्करी से जुड़े इस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कार्रवाई की गई है। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश में दबिश के दौरान 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए, जबकि हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक गोदाम से लगभग 15 टन खैर लकड़ी बरामद की गई। पुलिस का दावा है कि अब तक कुल 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है।


फर्जी बिल और ट्रांजिट पास से वैध दिखाने का आरोप

पुलिस की जांच के अनुसार, इस मामले में कथित तौर पर वास्तविक लकड़ी की आपूर्ति के बिना फर्जी बिल तैयार कराए गए। इन बिलों को वैध दिखाने के लिए वन विभाग के ट्रांजिट पास में कूटरचना और एचएसएन कोड के दुरुपयोग का आरोप है। जांच में विभिन्न फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये के लेन-देन की बात भी सामने आने का दावा किया गया है।


हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार हुआ फर्म संचालक

पुलिस ने 12 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, सतपाल सिंह की भूमिका कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क में सामने आई है। ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाए जाने के बाद उसे न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय में पेश किया जा रहा है।


इससे पहले पुलिस मनीष अग्रवाल, पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल को भी गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस ने बताया कि 7 सितंबर को मनीष अग्रवाल के मुड़पार स्थित मकान से 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। इसके अलावा, तस्करी से अर्जित बताई जा रही 1.70 करोड़ रुपये की नकदी भी हालिया कार्रवाई में जब्त की गई है।


अब सवाल यह है...

फिल्म ‘पुष्पा’ में तस्करी के लिए जंगलों और व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाने का चित्रण किया गया है। महासमुंद के इस मामले में भी पुलिस की जांच कथित फर्जी दस्तावेजों, फर्मों और बड़े वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क तक पहुंची है।


क्या खैर लकड़ी की तस्करी केवल जंगल से लकड़ी काटकर ले जाने तक सीमित थी, या इसके पीछे फर्जी बिलिंग और दस्तावेजों के सहारे चलने वाला बड़ा कारोबार था? इसका जवाब पुलिस की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएगा।


फिलहाल महासमुंद पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की विवेचना जारी है और कथित अपराध से अर्जित संपत्ति के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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