किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था हुई और सुदृढ़
नई दिल्ली/महासमुंद। (मनमीत सिंह छाबड़ा)
देश को यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने, किसानों को बुवाई के समय पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने तथा उत्पादन क्षमता में हुई वृद्धि को लेकर महासमुंद लोकसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती रूपकुमारी चौधरी द्वारा लोकसभा में पूछे गए तारांकित प्रश्न पर केंद्र सरकार ने विस्तृत जानकारी सदन में प्रस्तुत की। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने अपने उत्तर में बताया कि वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई नई निवेश नीतियों, बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों के पुनरुद्धार, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना से देश ने यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं।
लोकसभा में सरकार ने बताया कि नई निवेश नीति (NIP-2012) तथा उसके संशोधित प्रावधानों के तहत देश में 6 नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए। इनमें सार्वजनिक उपक्रमों के संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से रामागुंडम (तेलंगाना), गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), सिंदरी (झारखंड) और बरौनी (बिहार) में नए संयंत्र स्थापित किए गए। वहीं निजी क्षेत्र द्वारा पानागढ़ (पश्चिम बंगाल) और गडेपान (राजस्थान) में नई यूरिया उत्पादन इकाइयाँ शुरू की गईं। इन सभी संयंत्रों की क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जिससे देश की कुल उत्पादन क्षमता में 76.2 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष की वृद्धि हुई है।
सरकार ने सदन को बताया कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश की स्वदेशी यूरिया उत्पादन क्षमता वर्ष 2014-15 के 207.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2026-27 में 269.42 लाख मीट्रिक टन हो गई है। इसके साथ ही नई यूरिया नीति (NUP-2015) लागू होने के बाद संयंत्रों की दक्षता बढ़ी और हर वर्ष लगभग 20 से 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन संभव हो सका।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल यूरिया उत्पादन 2014-15 में 225 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2023-24 में रिकॉर्ड 314.07 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। वहीं 2025-26 में 293.30 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन दर्ज किया गया। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को और गति देने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को और मजबूत किया जा सकेगा।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को किसी भी फसल सीजन में उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रत्येक सीजन से पहले राज्यों की मांग का विस्तृत आकलन किया जाता है। मांग के अनुरूप राज्यों को मासिक आपूर्ति योजना जारी की जाती है तथा इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) के माध्यम से पूरे देश में उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण और परिवहन की निरंतर निगरानी की जाती है। इसके अलावा राज्यों के कृषि विभागों एवं उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाते हैं। सरकार के अनुसार खरीफ-2026 के दौरान देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित रही।
लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि 2004-05 से 2013-14 के बीच देश का औसत वार्षिक यूरिया उत्पादन 210.72 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 2014-15 से 2025-26 के दौरान यह बढ़कर 261.01 लाख मीट्रिक टन हो गया। सरकार ने इसे उर्वरक क्षेत्र में किए गए नीतिगत सुधारों, निवेश और उत्पादन क्षमता विस्तार का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।
सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना, खेती की लागत कम करना और देश को उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगातार दूरदर्शी एवं प्रभावी निर्णय लिए जा रहे हैं। इन निर्णयों का लाभ देश के करोड़ों किसानों को मिल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्पादन क्षमता में वृद्धि, आपूर्ति व्यवस्था के सुदृढ़ होने और नई नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध होगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था का लक्ष्य और मजबूत होगा।

